सुदेश शर्मा: अग्निपथ से आलोक तक – एक सशक्त नारी की अतुल्य गाथा कुरुक्षेत्र, हरियाणा की पावन भूमि से उपजी एक ऐसी शख्सियत, जिनका नाम है सुदेश शर्मा। यह नाम अब केवल एक पहचान नहीं, बल्कि अदम्य साहस, अनवरत संघर्ष और नारी शक्ति के उस प्रकाश-स्तंभ का प्रतीक बन चुका है, जो अंधकार में भी राह दिखाता है। एक प्रख्यात ज्योतिषी, एक न्याय-प्रिय अधिवक्ता और शक्ति राइज़ ग्लोबल फाउंडेशन की दूरदर्शी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में, उन्होंने जीवन के हर पड़ाव पर आने वाली बाधाओं, गहरी व्यक्तिगत पीड़ाओं और सामाजिक पूर्वाग्रहों का ऐसे धैर्य और दृढ़ता से सामना किया है, जो किसी भी आत्मा को विस्मित कर दे। उनकी यह असाधारण यात्रा उन सभी के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो यह मानते हैं कि जीवन में आने वाली हर चुनौती एक नए अवसर का द्वार खोलती है।बचपन की अनगढ़ राहें: जहाँ अभावों ने गढ़ी संघर्ष की पहली नींवसुदेश शर्मा का बचपन किसी रेशमी चादर जैसा नहीं था, बल्कि कंकड़-पत्थरों से भरी एक ऊबड़-खाबड़ राह थी। सामाजिक और आर्थिक अभावों ने कम उम्र से ही उन्हें घेर लिया। जहाँ अन्य बच्चे बेफिक्र होकर खेलते-कूदते थे, वहीं सुदेश जी ने अभावों के बीच जीवन की कठोर वास्तविकताओं को समझना शुरू कर दिया था। परिवार की सीमित आय और समाज की रूढ़िवादी सोच ने उनके लिए हर कदम पर मुश्किलें पैदा कीं। शिक्षा का मार्ग भी आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी नियति नहीं माना। उन्होंने हर बाधा को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। दसवीं करने के 12 वर्ष बाद पढ़ाई शुरु करके कई डिग्रऔ और डिप्लोमा प्राप्त किए और ज्ञान को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने का निश्चय किया। उनकी लगन ऐसी थी कि सभी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। यह उनके शुरुआती संघर्ष ही थे जिन्होंने उनमें जीवन की सबसे बड़ी लड़ाइयों को जीतने का अदम्य साहस और लचीलापन पैदा किया। एक ज्योतिषी के रूप में उन्होंने लोगों के मन में आशा का दीपक जलाया, उन्हें सही दिशा दिखाई; वहीं एक अधिवक्ता के रूप में उन्होंने समाज के वंचितों और पीड़ितों के लिए न्याय की बुलन्द आवाज़ उठाई। ये दोनों ही भूमिकाएं उनके गहरे सेवा भाव, आत्मनिर्भरता और अटूट मानवीय मूल्यों को दर्शाती हैं।स्वास्थ्य की अग्निपरीक्षा: जब शरीर ने दिया धोखा, पर आत्मा ने की विजयजीवन की यात्रा में एक ऐसा भयावह मोड़ भी आया जब सुदेश जी को बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं ने घेर लिया। यह वह दौर था जब असहनीय शारीरिक पीड़ा और मानसिक तनाव अपने चरम पर थे। डॉक्टरी रिपोर्ट्स निराशाजनक थीं और कई बार तो ऐसा लगा जैसे शरीर ने पूरी तरह से जवाब दे दिया है। यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लेकिन, सुदेश शर्मा किसी साधारण मिट्टी की बनी नहीं थीं। उन्होंने इस भयानक चुनौती को भी अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बनाया। उन्होंने न केवल आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का सहारा लिया, बल्कि योग, ध्यान और आयुर्वेद जैसे प्राचीन ज्ञान को भी अपने जीवन में उतारा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच ही सबसे बड़ी औषधि साबित हुई। हर सुबह, हर शाम, उन्होंने अपने भीतर की शक्ति को जगाया और अपनी प्रबल मानसिक शक्ति से रोगों पर विजय प्राप्त की। यह उनके जीवन का सबसे कठिन इम्तिहान था, जिसमें उन्होंने न केवल सफलता प्राप्त की, बल्कि यह साबित कर दिया कि मन का दृढ़ संकल्प शरीर की किसी भी दुर्बलता से कहीं अधिक विशाल और शक्तिशाली होता है। उनका यह अनुभव सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रहे हैं और जिन्हें एक उम्मीद की किरण की तलाश है।नारी सशक्तिकरण का महा-स्वप्न: ‘शक्ति राइज़ ग्लोबल फाउंडेशन’ – एक क्रांति का सूत्रपातअपने व्यक्तिगत संघर्षों से मिली गहरी सीख और समाज के प्रति अटूट अनुराग ने सुदेश शर्मा को एक नए, विशाल मिशन की ओर प्रेरित किया। उन्होंने महसूस किया कि उनके जैसी ही लाखों महिलाएं समाज में अनगिनत चुनौतियों, शोषण और अभावों से जूझ रही हैं, लेकिन उनके पास न तो कोई मंच है और न ही कोई सहारा। इसी दिव्य विचार ने ‘शक्ति राइज़ ग्लोबल फाउंडेशन’ की स्थापना की नींव रखी। यह फाउंडेशन केवल एक संगठन नहीं, बल्कि लाखों वंचित और शोषित महिलाओं के सपनों को पंख देने का एक विशाल आंदोलन, एक क्रांति का सूत्रपात है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में, सुदेश जी ने इस मंच के माध्यम से महिलाओं को उनके कानूनी, सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के प्रति न केवल जागरूक किया, बल्कि उन्हें इन अधिकारों को प्राप्त करने के लिए सशक्त भी बनाया।फाउंडेशन के तहत, उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए अनगिनत अभिनव और दूरगामी पहलें की हैं: * कौशल विकास के सुनहरे अवसर: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, कंप्यूटर शिक्षा, ब्यूटी पार्लर प्रशिक्षण, और विभिन्न हस्तशिल्प कलाओं में निपुण बनाया जाता है, ताकि वे स्वरोजगार के अवसर पैदा कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। * कानूनी सहायता और सशक्तिकरण शिविर: घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, संपत्ति के अधिकार और लैंगिक असमानता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर महिलाओं को मुफ्त कानूनी सलाह, मार्गदर्शन और उनके अधिकारों के प्रति विस्तृत जानकारी प्रदान की जाती है। * स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता: विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व पर व्यापक जागरूकता कार्यक्रम और स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाते हैं। * नेतृत्व विकास और क्षमता निर्माण: महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वे समाज में सक्रिय भागीदार बन सकें। * नारी प्रतिभा का मंच: फाउंडेशन विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, कार्यशालाओं और आयोजनों के माध्यम से महिलाओं को अपनी प्रतिभा, क्षमता और विचारों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है।सुदेश शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में, शक्ति राइज़ ग्लोबल फाउंडेशन आज देश के कोने-कोने में अपनी पहुँच बना चुका है, और अनगिनत महिलाओं के जीवन में एक स्थायी और सकारात्मक बदलाव ला रहा है। वह एक ऐसी तेजस्वी मशाल बनकर उभरी हैं, जो हर अंधेरे को चीरकर, हर महिला को अपने सपनों को पूरा करने और समाज में अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाने के लिए प्रेरित करती है।सम्मानों की आभा: संघर्षों की विजयगाथा और प्रेरणा का शाश्वत स्रोतसुदेश शर्मा के निस्वार्थ सेवा, अद्वितीय समर्पण और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान को न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सराहा गया है। उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अनगिनत सम्मानों और पुरस्कारों से नवाज़ा गया है। ये सम्मान उनके त्याग, लगन और महिलाओं के उत्थान के लिए किए गए अथक प्रयासों की सच्ची पहचान हैं। प्रत्येक सम्मान उनके संघर्षों की विजयगाथा सुनाता है और दर्शाता है कि किस प्रकार एक साधारण महिला अपने दृढ़ निश्चय, अटूट विश्वास और सकारात्मक कर्मों से समाज में एक असाधारण और दूरगामी परिवर्तन ला सकती है। ये उपलब्धियां केवल सुदेश जी के व्यक्तिगत गौरव का प्रतीक नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए एक अमर प्रेरणा हैं जो अपने जीवन में मुश्किलों का सामना करते हुए भी आगे बढ़ने का हौसला रखती हैं।सुदेश शर्मा का जीवन एक जीवंत दर्शन है, एक शाश्वत संदेश है: “परिस्थितियां कितनी भी कठिन और अंधेरी क्यों न हों, यदि आपमें हौसला है, तो आप हर चुनौती को एक अवसर में बदल सकते हैं, हर बाधा को पार कर सकते हैं और अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं। आपकी आंतरिक शक्ति ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है।” वह सही मायने में एक आइकॉन हैं, जिन्होंने अपनी संघर्षमयी यात्रा से दूसरों के लिए प्रेरणा का एक नया, उज्ज्वल अध्याय लिखा है। उनका जीवन इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि एक महिला अपनी संकल्प शक्ति से हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती है और समाज में एक स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन की वाहक बन सकती है।
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