यह कहानी है सुदेश शर्मा की। हरियाणा के जीन्द जिले की वो बेटी, जिसने ज़िंदगी के हर थपेड़े को अपनी ताकत बनाया, और हर बार पहले से ज़्यादा चमक के साथ लौटी। आज वे केवल एक प्रख्यात अधिवक्ता, एक विदुषी ज्योतिषी, या शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष ही नहीं हैं – वे हर उस व्यक्ति के लिए एक जीवंत प्रेरणा हैं जिसने कभी सोचा हो कि अब ज़िंदगी में कुछ नहीं हो सकता, जिसने हार को अपनी किस्मत मान लिया हो। यह सिर्फ संघर्ष की कहानी नहीं, यह उस अदम्य आत्मा की विजय-गाथा है जो राख से उठकर फीनिक्स की तरह गगन छूती है।जब थम गई दुनिया: 12 साल का सन्नाटा और सपनों का पुनर्जन्म ज़रा सोचिए: 1999 में, जब आपने 10वीं की परीक्षा पास की, तो भविष्य के कितने सपने बुने होंगे। लेकिन सुदेश जी के लिए, नियति ने एक क्रूर मोड़ लिया। उनकी पढ़ाई पर एक लंबा और गहरा विराम लग गया। पूरे 12 साल! एक पूरा दशक से भी ज़्यादा समय, जब ज़िंदगी की रफ्तार धीमी पड़ गई, सपने धूमिल पड़ने लगे। कौन सोच सकता था कि इस गहरे सन्नाटे के बाद कोई फिर से अपनी शैक्षिक यात्रा शुरू करेगा? लेकिन सुदेश जी के भीतर एक आग जल रही थी — ज्ञान की, पहचान बनाने की, कुछ कर दिखाने की। और फिर, 2011 में, उन्होंने सबको हैरत में डालते हुए 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। यह केवल एक डिग्री नहीं थी, यह उस अटल विश्वास का ऐलान था कि वक्त कितना भी गुज़र जाए, जुनून कभी मरता नहीं। यह उन तमाम लोगों के लिए करारा जवाब था जो परिस्थितियों को अपना बहाना बना लेते हैं। यह चीख-चीखकर कहती है, कि अगर आप में वाकई चाह है, तो उम्र या वक्त कभी मायने नहीं रखता।ज्ञान का महाकुंभ: हर डुबकी में नया जीवन, हर डिग्री एक नई विजय एक बार जब शिक्षा की धारा बही, सुदेश जी ने उसे एक विशाल महाकुंभ में बदल दिया। उन्होंने हर विषय की गहराई में डुबकी लगाई और ज्ञान के बेशकीमती मोती निकाले, जो उनकी अद्वितीय बहुमुखी प्रतिभा और सीखने की अदम्य ललक का प्रमाण है: * स्नातक की डिग्री लेकर उन्होंने अपनी शैक्षिक यात्रा को नई गति दी, एक मज़बूत नींव रखी। * बी.एड. करके उन्होंने शिक्षा के पवित्र क्षेत्र में कदम रखा, जहाँ वे दूसरों को राह दिखा सकें। * लेकिन उनकी शैक्षिक यात्रा का सबसे चमकीला अध्याय है तीन-तीन एम.ए. डिग्रियां! उन्होंने ज्योतिष, हिन्द और वेद जैसे बिल्कुल अलग-अलग, पर जीवन के गूढ़ और आधुनिक पहलुओं से जुड़े विषयों में महारत हासिल की। यह दर्शाता है कि उनकी सीखने की भूख कितनी विशाल थी – वे सिर्फ ज्ञान बटोरना नहीं, बल्कि उसे समझना और जीवन में उतारना चाहती थीं। * उन्होंने विभिन्न व्यावहारिक कौशलों कम्प्यूटर साइंस और ज्योतिष शास्त्र में 7 डिप्लोमा भी प्राप्त किए, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और हर चुनौती के लिए खुद को तैयार रखने की ललक को दर्शाता है। यह जुनून ही तो है जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है, एक ऐसा व्यक्तित्व जो हर क्षेत्र में अपना परचम लहराता है!
न्याय की रणभूमि: एक ही वार में दुश्मन ढेर, असंभव हुआ संभव!इतनी व्यापक और विविध शिक्षा हासिल करने के बाद, सुदेश जी ने एक ऐसे क्षेत्र में कदम रखा जहाँ सबसे तेज़ दिमाग और सबसे मज़बूत इरादे वाले लोग ही टिक पाते हैं – कानून की दुनिया। उन्होंने एल.एल.बी. की पढ़ाई पूरी की, न्याय और समाज के प्रति अपने गहरे समर्पण को दर्शाते हुए। और फिर आया वो निर्णायक पल, वो अग्निपरीक्षा, जिसने उनकी असाधारण क्षमता का लोहा मनवा दिया।भारत में वकालत के लिए सबसे कठिन मानी जाने वाली ऑल इंडिया बार एग्जाम (AIBE) को उन्होंने अपनी पहली ही कोशिश में पास कर लिया! यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। जहाँ हजारों अभ्यर्थी सालों तक इस परीक्षा से जूझते रहते हैं, सुदेश जी ने अपने अथक परिश्रम, अकाट्य बुद्धि और इस्पात जैसे संकल्प के दम पर इसे एक ही झटके में भेद दिया। यह सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं था, यह साबित करना था कि जब मन में ठान लिया जाए, तो दुनिया की कोई भी चुनौती, कोई भी मुश्किल, आपके रास्ते को रोक नहीं सकती। यह दिखाता है कि ‘असंभव’ तो बस एक शब्द है, और ‘हार’ एक विकल्प!उम्मीद का प्रकाश स्तंभ: एक मिसाल जो हर अँधेरे को रोशनी देती हैआज, सुदेश शर्मा केवल एक सफल अधिवक्ता और कुशल ज्योतिषी ही नहीं हैं, बल्कि वे शक्ति राइज ग्लोबल फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में हज़ारों महिलाओं के जीवन में उम्मीद का दीया जला रही हैं। उनकी कहानी उन सभी लोगों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है जो ज़िंदगी की मुश्किलों से थक जाते हैं, जो सोचते हैं कि उनके सपने अब सिर्फ सपने ही रहेंगे, या जिनके पास पीछे मुड़कर देखने के लिए सिर्फ ‘काश’ रह गया हो।सुदेश शर्मा ने साबित किया है कि सच्ची लगन, अथक मेहनत और अटूट विश्वास के सामने दुनिया की कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। उनकी यात्रा हमें सिखाती है कि कैसे मुश्किलों को अपनी ताकत बनाएं, कैसे अपनी कमज़ोरियों को अपनी ताक़त में बदलें, और कैसे अपने सपनों को सिर्फ देखना नहीं, बल्कि उन्हें हकीकत में जी कर दिखाएं। उनका जीवन एक शक्तिशाली, गूंजता हुआ संदेश है:”उठो! अगर ज़िंदगी ने तुम्हें रोका है, तो यह तुम्हें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हें और मजबूत बनाने के लिए है। तुम्हारे भीतर वो शक्ति है जो हर मुश्किल को झुका सकती है। अपनी उस शक्ति को पहचानो, और दुनिया को दिखा दो कि तुम कौन हो! क्योंकि तुम्हारी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, यह तो अभी शुरू हुई है।”क्या आप भी अपनी अंदरूनी शक्ति को पहचानकर, सुदेश जी की तरह अपने हर सपने को सच करने के लिए तैयार हैं?
